Monday, October 7, 2013
नए ‘महिषासुर’ हैं बलात्कार
कोलकाता। महिलाओं के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों ने दुर्गा पूजा के आयोजकों को इस बार पंडालों में महिला सशक्तीकरण की अवधारणा का प्रस्तुतीकरण करने के लिए प्रेरित किया है। पंडालों में बलात्कारियों को महिषासुर के रूप में पेश किया जा रहा है। महिषासुर नामक राक्षस का देवी द्वारा संहार किया जाता है।
आयोजकों ने कहा कि हम दिखाना चाहते हैं कि पौराणिक युग की बुरी शक्तियां या राक्षस आज की महिलाओं को तकलीफ देने के लिए बलात्कारियों के रूप में लौटकर आए हैं। ये पुरुष ा आज के महिषासुर हैं।
सॉल्ट लेक इलाके में सामुदायिक पूजा के आयोजकों ने देवी दुर्गा के 11 विभिन्न स्वरूप बनाए हैं, जिनमें से 10 स्वरूपों में वह बलात्कारियों के रूप में दिखाए गए उन राक्षसों का संहार कर रही हैं, जो महिलाओं की अस्मिता से खिलवाड़ कर रहे हैं।
एफडी ब्लॉक पूजा समिति के अध्यक्ष प्रदीप सेनगुप्ता ने बताया कि हमारी थीम विश्व में हर जगह से बलात्कारियों को समाप्त करने पर आधारित है। मां दुर्गा को बुरी शक्तियों के विनाश के लिए जाना जाता है और आज बलात्कारी उन सबसे बड़ी बुराईयों में से एक हंै जो कि हमारे समाज को कष्ट पहुंचा रहे हैं। एक राक्षस को एक ऐसे पुरुष के रूप में दिखाया गया है, जिसने एक सूट पहन रखा है और वह एक महिला को घूर रहा है। इस आदमी का चेहरा राक्षस का है और दुर्गा को उसपर ‘त्रिशूल’ से वार करते हुए दिखाया गया है।
सेनगुप्ता ने कहा कि प्रतीकों के माध्यम से हम यह दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं कि दुर्भाग्यवश बलात्कार सभी तरह की जगहों पर होते हैं। हमारी महिलाएं प्रताड़ित हो रही हैं और अब समाज के अच्छे लोगों को उठना चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए।
भवानीपुर में एक अन्य प्रसिद्ध पूजा आयोजक ने महिलाओं के सम्मान की सुरक्षा की जरूरत को दर्शाने के लिए 250 किलोग्राम धागे से 5 किलोमीटर लंबी हैंडलूम की साड़ी बनाई है। भवानीपुर 75 पल्ली सर्बजनीन दुर्गोत्सव समिति के सचिव सुबीर दास ने कहा कि जब भी हम असुरक्षित महसूस करते हैं तो अपनी मां के ‘आंचल’ में शरण लेना चाहते हैं, फिर चाहे हमारी उम्र कुछ भी हो। लेकिन अब माताआें और बहनों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ जाने की वजह से वे खतरे में हैं। इस 5 किलोमीटर लंबी साड़ी में हम महिलाओं के सशक्तीकरण की जरूरत की बात कर रहे हैं।
भवानीपुर पूजा के लिए पंडाल तैयार करने में कलाकार सोमनाथ मुखोपाध्याय को तीन माह का समय लगा। सोमनाथ कहते हैं कि आंचल एक महिला की आबरू और सुरक्षा का प्रतीक है। -एजेंसी। bhasa
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