Friday, June 7, 2013

पैदल ही डाक बांटती हैं 'रानी'

नागपुर। 6 जून 23 साल से शहर में महत्वपूर्ण डाक बांटने वाली जीपीओ की पहली महिला पोस्ट वूमेन रानी हीरामंडल पैदल ही डाक बांटने का काम करती हैं. उनके कार्यक्षेत्र में अधिकांश बडे. सरकारी कार्यालय आते हैं. पैदल चलने के बावजूद वे शत प्रतिशत डाक बांटने में सफल रही हैं. यही वजह है कि 4 जून को डाक विभाग ने उन्हें सम्मानित किया है. उनके पति मोरेश्‍वर हीरामंडल वायुसेना नगर में सब पोस्ट मास्टर हैं लेकिन, दोनों के बीच काम को लेकर कभी कोई शिकवा नहीं रहा.जीपीओ की पोस्ट वूमेन रानी मोरेश्‍वर हीरामंडल 1991 में पिता की मौत के बाद अनुकंपा आधार पर इस पद पर नियुक्त हुईं. 1998 में उनकी शादी हुई. उनका एक 14 साल का बेटा है. o्रीमती रानी परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए सुबह 8 बजे से शाम 5.30 बजे तक पैदल चलकर डाक बांटने का काम करती हैं .उन्होंने बताया कि उनका मायका व ससुराल भी नागपुर का ही है. नौकरी के साथ उन्हें ससुराल के अलावा मायके की भी जिम्मेदारी संभालनी पड.ती है. काम की थकान बहुत रहती है लेकिन, मैं खुशनसीब हूं कि पति व पुत्र के अलावा डाक विभाग व अन्य विभागों के अधिकारियों का प्रोत्साहन भी मिलता है.पैदल चलने का सबसे बड.ा फायदा ये है कि मुझे कभी कोई बड.ी बीमारी नहीं हुई. प्रतिदिन 1000 से 1500 डाक बांटती हूं. मैं तो केवल काम करते चली गई लेकिन विभाग ने शत प्रतिशत डाक बांटने पर 4 जून को मुझे पुरस्कृत किया है( from lokmat samachar.nagpur

Thursday, June 6, 2013

बहन ने की लव मैरेज, भाई ने किया जीजा का मर्डर

नई दिल्ली।। साउथ वेस्ट दिल्ली के पालम क्षेत्र के मंगलापुरी इलाके में बुधवार रात एक युवक आकाश ने अपने ही जीजा सुरेश की चाकू से गोद कर हत्या कर दी और फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने छानबीन कर मृतक की बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल भेज दिया। मृतक का नाम सुरेश (25) है, जो पालम के मंगोलपुरी फेज-2 में रहता था। सुरेश की गलती यही थी कि उसने करीब डेढ़ साल पहले मोनिका नाम की लड़की से लव मैरेज की थी। इस बात को लेकर मोनिका का भाई आकाश (22) नाराज था। कई बार धमकी भी दे चुका था कि वह सुरेश को मार डालेगा। मोनिका ने बताया कि उसके भाई ने उसके पति को मार दिया और भाग गया। भाई इसलिए नाराज था कि उसने दूसरी बिरादरी के लड़के सुरेश से अपनी पसंद से शादी की थी। मोनिका का कहना है कि आकाश ने पहले भी मुझसे कहा था कि मैं उसे मार डालूंगा। इस शादी को लेकर घर वाले पहले तैयार नहीं थे, लेकिन बाद में पापा को मंजूर हो गया था। मेरा भाई राजी नहीं था। अभी तक आरोपी आकाश पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है। -नवीन निश्चल// नवभारत टाइम्स | Jun 6, 2013

रेप पीड़िता के गर्भ में 8 माह का बच्चा, कोर्ट से मांगी मदद

नई दिल्ली| दुष्कर्म की शिकार होने के बाद से घरवालों ने 19 वर्षीय रेप पीड़िता को उसे अपने हाल पर छोड़ दिया है। पेट में पल रहे आठ माह के बच्चे को जन्म देने और अपने बेहतर स्वास्‍थ्य के लिए उसने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। रेप पीड़िता ने कोर्ट में दायर याचिका में अपने बच्चे को जन्म देने के लिए सरकार से मेडिकल और वित्तीय मदद की मांग की है। साथ ही उसने कहा है कि बालिग होने तक सरकार उसके बेटे की देखभाल करे। उसने कहा है कि वह एक बहुत ही गरीब परिवार से है। गरीबी के कारण ही उसके घरवालों ने उसे ठुकरा दिया है। वह उसके इलाज का खर्च नहीं उठा सकते हैं। कोर्ट ने ‌केंद्र और दिल्ली सरकार को इस मामले में जबाव देने का निर्देश्‍ा दिया है। पीड़िता के वकील ने बताया कि सामाजिक कलं‌क के कारण ही उसके घरवालों ने उसे छोड़ दिया है। पीड़िता की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है और वह बच्चे को जन्म देने में लगने वाला खर्च नहीं उठा सकती है। वह फिलहाल अपने दूर के एक रिश्तेदार के यहां रह रही है। वकील ने बताया कि उसने अपना गर्भपात कराने के लिए कोर्ट में याचिका दी थी लेकिन बाद डॉक्टरों ने इससे इनकार कर दिया। गौरतलब है कि अक्टूबर 2012 में एक पड़ोसी ने उससे रेप किया था। उसने यह बात किसी से बताने पर भाई की हत्या करने की धमकी दी थी। आरोपी अभी भी फरार है। from amar ujala

कहां गुम हो जाती हैं टॉपर बेटियां?


क्या सपने सचमुच साकार हो रहे हैं ? लीना/ इन दिनों परीक्षा परिणामों का दौर रहा है। बेटियां इतिहास रच रही हैं, अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लगभग सभी परीक्षाओं में लड़कों के मुकाबले वे ही अव्वल आ रही हैं, टॉप कर रही हैं। छात्राओं के उतीर्ण होने का प्रतिशत भी छात्रों की अपेक्षा अधिक ही रह रहा है। सीबीएससी 10वीं की परीक्षा में 99 फीसदी छात्राएं पास हुईं हैं, तो 12वीं में भी 85 फीसदी, जबकि केवल 73 प्रतिशत लड़के पास हुए। बिहार में तो सीबीएससी 12वी बिहार और बिहार बोर्ड के तीनों संकायों विज्ञान, कला और कामर्स में न सिर्फ उन्होंने बाजी मारी है, बल्कि तीनों में टॉप भी किया है। कला संकाय में तो टॉप 20 में 19 लड़कियां ही हैं। इन परिणामों ने बेटियों को हौसला दिया है और उन्हें सपने देखने का हक भी। कोई वैज्ञानिक बनना चाहती है तो कोई प्रशासनिक अधिकारी, कोई डाक्टर-इंजिनीयर तो कोई सीए. शिक्षिका.....। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़कर काम करने का, खुद के पांव पर खड़े होने का और परिवार को संबल देने का- बेटियां अब सपने देख रही हैं। बहुत खूब! लेकिन क्या ये सपने सचमुच साकार हो पाते हैं, हो पाएंगे ? या कि आगे चलकर हमारे पुरूष सत्तात्मक समाज में अपने सपनों की कुर्बानी देकर उन्हें ही फिर ‘‘घर बैठना’’ पड़ जाएगा। अब तक के आंकड़े तो यही कहते हैं। एक ओर दसवीं में 99 फीसदी पास होने वाली बेटियां हैं, तो दूसरी ओर हमारे देश के शहरों में मात्र 15.4 प्रतिशत ही कामकाजी महिलाएं हैं। देश के ग्रामीण क्षेत्र में जरूर 30 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं हैं, जिनकी बदौलत ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों में मिलाकर जरूर औसतन 25 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं हो जाती हैं। कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा ऐसा इसलिए नजर आता है कि गांवों में खेतों में मजदूरी का काम करने वाली महिलाओं की संख्या काफी है। ग्रामीण कृषि महिला मजदूरों का प्रतिशत करीब 49 है। और इनमें शायद ही 99 फीसदी पास होने वाली बेटियां हों। तो देखा जाए तो इन पढ़ी लिखी बेटियों में से महज 15 प्रतिशत ही कामकाजी बन पाती हैं। जबकि इनमें स्थायी तौर पर और थोड़ी अवधि (3-6 महीने, कुछ साल) तक काम करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। तो कहां गुम हो जाती हैं ये टॉपर बेटियां ? कहां दफन हो जाते हैं उनके सपने ? कुछ को तो इससे आगे उच्च शिक्षा पाने का ही मौका नहीं मिल पाता है, विभिन्न कारणों से। जबकि किसी तरह पास कर गए बेटों को भी हमारा समाज किसी न किसी तरह उच्च शिक्षा में दाखिला दिलवा ही देता है। जबकि बेटियों को किसी तरह विदा कर देने की जिम्मेवारी समझने वाला समाज उसे साधारण शिक्षा दिलाकर उन्हें ब्याहकर ‘मुक्ति’ पा लेता है। हां कई बेटियां आगे मनमुताबिक पढ़ पाती हैं। लेकिन उनमें से भी अधिकतर आगे चलकर घर-परिवार की जिम्मेदारियों में ही बांध दी जाती हैं/ बंधने को विवश कर दी जाती हैं। और इस तरह देश की जनगणना में कामकाजी महिलाओं वाले खाने में रहने की बजाये उनकी गिनती ही कहीं नहीं रह जाती है। आखिर इनकी चाहतें हकीकत क्यों नहीं बन पातीं ? क्यों नहीं मिल पाता इनके सपनों को उड़ान ? सवाल एक है, वजहें कई-कई। और इनके जबाव न सिर्फ हमें तलाशने होंगे, बेटियों को जबाव देना भी होगा। -----

शादी करना चाहता था मामा, मना करने पर गला घोंट कर दी हत्या

एजेंसी,हाथरस उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक रेस्तरां में 20 वषीर्य बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा का शव बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि मंगलवार शाम...