नागपुर। 6 जून
23 साल से शहर में महत्वपूर्ण डाक बांटने वाली जीपीओ की पहली महिला पोस्ट वूमेन रानी हीरामंडल पैदल ही डाक बांटने का काम करती हैं. उनके कार्यक्षेत्र में अधिकांश बडे. सरकारी कार्यालय आते हैं. पैदल चलने के बावजूद वे शत प्रतिशत डाक बांटने में सफल रही हैं. यही वजह है कि 4 जून को डाक विभाग ने उन्हें सम्मानित किया है. उनके पति मोरेश्वर हीरामंडल वायुसेना नगर में सब पोस्ट मास्टर हैं लेकिन, दोनों के बीच काम को लेकर कभी कोई शिकवा नहीं रहा.जीपीओ की पोस्ट वूमेन रानी मोरेश्वर हीरामंडल 1991 में पिता की मौत के बाद अनुकंपा आधार पर इस पद पर नियुक्त हुईं. 1998 में उनकी शादी हुई. उनका एक 14 साल का बेटा है. o्रीमती रानी परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए सुबह 8 बजे से शाम 5.30 बजे तक पैदल चलकर डाक बांटने का काम करती हैं .उन्होंने बताया कि उनका मायका व ससुराल भी नागपुर का ही है. नौकरी के साथ उन्हें ससुराल के अलावा मायके की भी जिम्मेदारी संभालनी पड.ती है. काम की थकान बहुत रहती है लेकिन, मैं खुशनसीब हूं कि पति व पुत्र के अलावा डाक विभाग व अन्य विभागों के अधिकारियों का प्रोत्साहन भी मिलता है.पैदल चलने का सबसे बड.ा फायदा ये है कि मुझे कभी कोई बड.ी बीमारी नहीं हुई. प्रतिदिन 1000 से 1500 डाक बांटती हूं. मैं तो केवल काम करते चली गई लेकिन विभाग ने शत प्रतिशत डाक बांटने पर 4 जून को मुझे पुरस्कृत किया है( from lokmat samachar.nagpur
Friday, June 7, 2013
पैदल ही डाक बांटती हैं 'रानी'
नागपुर। 6 जून
23 साल से शहर में महत्वपूर्ण डाक बांटने वाली जीपीओ की पहली महिला पोस्ट वूमेन रानी हीरामंडल पैदल ही डाक बांटने का काम करती हैं. उनके कार्यक्षेत्र में अधिकांश बडे. सरकारी कार्यालय आते हैं. पैदल चलने के बावजूद वे शत प्रतिशत डाक बांटने में सफल रही हैं. यही वजह है कि 4 जून को डाक विभाग ने उन्हें सम्मानित किया है. उनके पति मोरेश्वर हीरामंडल वायुसेना नगर में सब पोस्ट मास्टर हैं लेकिन, दोनों के बीच काम को लेकर कभी कोई शिकवा नहीं रहा.जीपीओ की पोस्ट वूमेन रानी मोरेश्वर हीरामंडल 1991 में पिता की मौत के बाद अनुकंपा आधार पर इस पद पर नियुक्त हुईं. 1998 में उनकी शादी हुई. उनका एक 14 साल का बेटा है. o्रीमती रानी परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए सुबह 8 बजे से शाम 5.30 बजे तक पैदल चलकर डाक बांटने का काम करती हैं .उन्होंने बताया कि उनका मायका व ससुराल भी नागपुर का ही है. नौकरी के साथ उन्हें ससुराल के अलावा मायके की भी जिम्मेदारी संभालनी पड.ती है. काम की थकान बहुत रहती है लेकिन, मैं खुशनसीब हूं कि पति व पुत्र के अलावा डाक विभाग व अन्य विभागों के अधिकारियों का प्रोत्साहन भी मिलता है.पैदल चलने का सबसे बड.ा फायदा ये है कि मुझे कभी कोई बड.ी बीमारी नहीं हुई. प्रतिदिन 1000 से 1500 डाक बांटती हूं. मैं तो केवल काम करते चली गई लेकिन विभाग ने शत प्रतिशत डाक बांटने पर 4 जून को मुझे पुरस्कृत किया है( from lokmat samachar.nagpur
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