Tuesday, March 8, 2011

खाप पंचायतों के जुल्मों से उपजी ‘काला पानी’

फरीदाबाद. दूसरी जाति के लड़के से प्रेम करने वाली नौकरानी के माथे पर कुल्टा लिखा देखकर द्रवित हुआ मन। यहीं से लिया इन कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने का प्रण। हिसार की बेटी, फरीदाबाद की बहू और बॉलीवुड के सबसे बड़े दादा साहब फाल्के अवार्ड से नवाजी गई मुंबई की सफल निर्देशक प्रीति अनेजा बनी महिलाओं के लिए आइडल।
अपनी एक महिला नौकरानी पर जब प्रीति अनेजा ने खाप पंचायतों का जुल्मो सितम देखा तो उनका संवेदनशील मन कुछ करने को उद्वेलित हो गया। यह बात करीब 25 साल पहले हरियाणा के एक छोटे से शहर हिसार की है। हरियाणा में होने वाले महिला उत्पीड़न की दास्तां दुनिया को दिखाने के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया।
लंबे संघर्ष और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने खाप पंचायतों के जुल्मों को दर्शाती काला पानी नामक लघु फिल्म बनाई। यही नहीं अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित 106 फिल्मों में इसे सर्वेश्रष्ठ फिल्म का अवार्ड भी मिला। फिल्म की निर्माता-निर्देशक फरीदाबाद की बहू प्रीति को अभी हाल ही में बॉलीवुड का प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिला है।
फरीदाबाद के सेक्टर-14 निवासी बिजनेसमैन अमृत अनेजा के साथ ब्याही प्रीति पर महिला जगत को नाज है। उनके संवेदनशील स्वभाव ने जो बात अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाई है उम्मीद है कि, सरकारें उससे कुछ सीखेंगी और तथाकथित प्रगतिशील इस राज्य में महिलाओं पर उत्पीड़न रोकने के लिए कुछ करेंगी।
अनेजा बताती हैं कि जब वह हिसार में सातवीं क्लास मंे पढ़ती थीं तो उनके घर एक नौकरानी सरला आती थी। जो अपने माथे को हमेशा ढंक कर रखती थी। जिज्ञासावश उन्होंने मां से जिद की, उनकी मां ने नौकरानी का माथा दिखाया तो वह सन्न रह गईं। उसके माथे पर कुल्टा लिखा था। अनेजा ने बताया कि उनकी नौकरानी को यह सजा पंचायत ने दी थी, क्योंकि वह किसी गैर जाति के लड़के से प्यार करती थी। इसीलिए उसे पंचायतों ने गांव निकाला देकर माथे पर हमेशा के लिए कलंक गुदवा दिया था।
कैसे शुरू हुआ संघर्ष का सफर लगभग 21 वर्षीय अनेजा की ग्रेजुएशन करते हुए ही १९९६ में फरीदाबाद में शादी हो गई। उनके पास इस दौरान मॉडलिंग एक्टिंग के कई ऑफर आए थे, लेकिन नौकरानी पर हुए जुल्म की दास्तां दिखाने के लिए उनकी दिलचस्पी निर्देशन में हो गई थी। 2003 में अनेजा मुंबई गई। उस समय उनका दो माह का बेटा था। जब बच्च तीन वर्ष का हुआ तो उन्होंने सुभाष घई के विस्टलिंग वुड्स इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट से निर्देशन का कोर्स शुरू किया।

दिन रात के असाइनमेंट कंपलीट करने के दौरान उन्हें अपने घर वालों से बात करने का समय नहीं मिलता था। जब बच्चे के मासूम चेहरे को देखती थीं तो कई बार हिम्मत टूट गई कि अब वे इस लाइन को छोड़ देंगी, लेकिन पति अमृत और ससुर के सपोर्ट ने आगे बढ़ने का हौसला दिया। पर अब भी नौकरानी की वो छवि दिमाग से नहीं गई थी। प्रीती ने इसी को आधार बनाते हुए खाप पंचायतों के खिलाफ काला पानी नामक लघु फिल्म बना डाली।
25 मिनट की इस फिल्म को 23 जनवरी 2011 को नासिक में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया। काला पानी हाउसफुल रही और दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिला। उनका कहना है कि हरियाणा में एक ही बात के लिए महिला को कठोर सजा दी जाती है और पुरुष को सिर्फ जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है। प्रीति कहती हैं कि समानांतर सरकार चला रही खाप पंचायतों को यहां की महिलाओं में जागरुकता लाकर ही खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह अपनी आने वाली लघु फिल्म बिग ब्रो की स्क्रिप्ट लिख रही हैं। इसके अलावा वे पंजाब में भी एक फीचर फिल्म पर काम कर रही हैं। जिसकी शूटिंग जल्द ही शुरू हो जाएगी। Source: अनीता भाटी | Last Updated 01:14(08/03/11) http://www.bhaskar.com/article/HAR-OTH-khape-panchayat-julmon-comes-1914851.html?HF=

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