नई दिल्ली।। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से विवादास्पद शब्द रखैल हटाने की मांग वाली महिला संगठन की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी पुरुष के साथ एक रात गुजार लेने से कोई महिला गुजारा भत्ता के लिए हकदार नहीं मानी जाएगी। इस फैसले में रखैल शब्द इस्तेमाल हुआ था। महिला दक्षता समिति का कहना था कि वैवाहिक स्थिति के आधार पर महिलाओं के लिए यह शब्द अपमानजनक और भेदभावपूर्ण है।
समिति की ओर से दायर इस याचिका को जस्टिस मार्कंडेय काटजू और टी.एस. ठाकुर की बेंच ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि फैसले पर सवाल खड़ा करने का समिति को कोई अधिकार नहीं है। ऐसा इसलिए कि जिस वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में यह फैसला दिया गया है उसमें समिति पक्षकार नहीं है।
पिछले साल 21 अक्टूबर को दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, यदि किसी पुरुष के पास रखैल है जिसकी वह आर्थिक जरूरतें पूरी करता है और उसका इस्तेमाल मुख्य तौर पर सेक्स के लिए या नौकरानी के रूप में करता है तो हमारे विचार से वह संबंध शादी जैसा नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में व्यवस्था दी थी कि जो महिला लिव इन रिलेशन के तहत रहती है वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है, जब तक वह कुछ मानदंडों को पूरा नहीं करती हो। कोर्ट ने कहा था कि महज वीकएंड में साथ रहने या एक रात साथ बिताने से उसका संबंध पारिवारिक नहीं बन जाता।
देश की एकमात्र महिला अडिशनल सॉलिसीटर जनरल इंदिरा जयसिंह और समिति के उपाध्यक्ष विनय भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी हटाने से इंकार पर निराशा जताई है। 17 Mar 2011, 10.56 hrs IST,पीटीआई
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आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
ReplyDeletehttp://vangaydinesh.blogspot.com/2011/03/blog-post_12.html